सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
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बुधवार, 13 अक्टूबर 2010

असर

बहुत खूब है ऐ इश्क तेरी फ़ितरत, हम मर रहे हैं और उनको खबर भी नही ।

मुडकर ना देखा उन्होने आज तलक, हमारी आहों में इतना असर भी नही ॥

रविवार, 5 सितंबर 2010

वक्त की दीवार

वक्त की दीवार पर नाम लिखने को प्यार की स्याही और दिल की कलम चाहिये ।
इंसा पे यकीन हो ,और दिल मे प्यार हो तो जीने को और क्या चाहिये ॥

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

इन्कार

कर लो लाख इनकार मगर,

रंग लायेगी हमारी आशिकी भी एक दिन ।

हर गली में हमारे चरचे होंगे,

पतझड में भी बहार आयेगी एक दिन ॥

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

प्यार

तुम दिल से पुकारो, तो ये जमीं तुम्हारी ,ये आसमां तुम्हारा हो जायेगा।

गर इन्सान से, मोहब्बत का नाता रखो, तो ये जहां तुम्हारा हो जायेगा ॥

बुधवार, 14 जुलाई 2010

ज़माना

ज़माना दिल्लगी चाहे, तो आंसू पलकों मे पीले । 

ज़िन्दगी बरबाद ना कर,औरों के लिये जी ले ॥

सोमवार, 12 जुलाई 2010

मोहब्बत

आन्खों की कोर से छ्लकती है मोहब्बत,

तिरछी चितवन से महकती है मोहब्बत।

अब और क्या क्या बयां करें हम भी,

तू सर से पांव तक है मोहब्बत ही मोहब्बत

शनिवार, 10 जुलाई 2010

एह्सास-ए-मोहब्बत

ये एह्सास-ए-मोहब्बत है जो तुम न समझ पाओगे । 

यूंकि समझने के लिये प्यार भरा दिल कहां से लाओगे ॥

मंगलवार, 15 जुलाई 2008

प्यार

हर याद को तराना बना देंगे,
हर आह को नजराना बना देंगे।
बस इकरार तो कर दो प्यार का ,
फ़िर इज़हार को फ़साना बना देंगे ॥

गुरुवार, 10 जनवरी 2008

इश्क

इश्क की दुनिया में हुस्न का बसेरा है।
तेरी हर मुस्कराहट मेरे लिए इक नया सवेरा है ॥

शनिवार, 29 दिसंबर 2007

मोहब्बत

ठूंठ था मैं मोहब्बत करना सिक्हा दिया तूने ।
जानवर था इंसान बना दिया तूने॥
मस्ती में बेफिक्री में जिया करता था।
प्यार में पागल बना दिया तूने॥

बुधवार, 19 दिसंबर 2007

इश्क

इश्क कि दुनिया में हुस्न का बसेरा है।
तेरी हर मुस्कराहट मेरे लिए इक नया सवेरा है॥

गुरुवार, 6 दिसंबर 2007

मोहब्बत मे जलना

जलना है यूं तिल तिल के,
अगर मालूम होता।

तो खुदा की कसम तुमसे,
इतनी मोहब्बत न करता॥

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अभी तलाश मे हूं कि . . . . मैं कौन हूं ? ? ?