सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
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सोमवार, 2 अगस्त 2010

मुस्कुराहट

रास्ते से गुजरते गुजरते जो तुमको मुस्कुराते देखा ।

यकीं न आया हमें, लगा कि कोई सपना देखा ॥

बुधवार, 28 जुलाई 2010

हुस्न

तेरे लाजवाब हुस्न को देखकर मेरा दिल बेगाना हो गया । 

तेरी जुल्फ़ों की वादियों मे फ़िर एक दीवाना खो गया ॥

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

हुस्न

हुस्न बेपर्दा हो रहा है कुछ इस तरह । 

गोया चान्द निकला बादलों से जिस तरह ॥

मंगलवार, 15 जुलाई 2008

हुस्न के नाम

दिल की हर धड़कन को तेरे नाम कर दूँगा,
लबों से निकले हर लफ्ज़ पे अपना पैगाम रख दूँगा।
तू एक बार अपने दिल मै जगह दे दे मुझको,
अपनी सारी उम्र तेरे हुस्न के नाम कर दूँगा॥

गुरुवार, 10 जनवरी 2008

हुस्न

तेरे बेपनाह हुस्न को देखकर कुछ सोचता हूँ मैं ।
दर पे आता हूँ उम्मीदों से पर बैरंग लौटता हूँ मैं॥

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
अभी तलाश मे हूं कि . . . . मैं कौन हूं ? ? ?