सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
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बुधवार, 14 जुलाई 2010

ज़माना

ज़माना दिल्लगी चाहे, तो आंसू पलकों मे पीले । 

ज़िन्दगी बरबाद ना कर,औरों के लिये जी ले ॥

मंगलवार, 13 जुलाई 2010

शायर

कुछ लोग हम पे हंसते हैं,क्युंकि हम शायर हैं ।

कुछ लोग हम पे मरते हैं,क्युंकि हम शायर हैं ।।

मेरे बारे में

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अभी तलाश मे हूं कि . . . . मैं कौन हूं ? ? ?