सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
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सोमवार, 26 जुलाई 2010

जुदाई

तेरी जुदाई बेकरार किये जाती है, 

दर्द-ए-दिल को ज़ार ज़ार किये जाती है । 

आ जाती है सामने तस्वीर हर पल तेरी, 

आखों में नमी का आगाज़ किये जाती है ॥

मंगलवार, 9 जून 2009

दीदार

जान-ए-बहार ऑंखें तरस गई हैं तेरे दीदार को ।
एक झलक तो दिखला जा इस दिल-ए-बीमार को ।

शनिवार, 29 दिसंबर 2007

जुदाई

दिल तड़पता है, आंसू बहते हैं ,तेरी जुदाई का गम हर पल सहते हैं।
बेदर्द है तू, जानते हैं हम, फिर भी इस दुनिया में सिर्फ तुम पर ही मरते हैं॥

जुदाई

तेरी जुदाई बेकरार किये जाती है,
दर्द -ए-दिल से जार जार किये जाती है।
आ जाती है तस्वीर हर पल तेरी सामने,
आंखों में नमी का आगाज किये जाती है॥

शनिवार, 1 दिसंबर 2007

जुदाई

तुम जा रहे हो, दिल कि वीना के तार तोड़कर ।
कहाँ से लाऊं वो रागिनी टूटे तारों को छेड़कर ॥

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अभी तलाश मे हूं कि . . . . मैं कौन हूं ? ? ?