सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
यादें लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
यादें लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 25 जुलाई 2010
गुरुवार, 10 जनवरी 2008
गुरुवार, 13 दिसंबर 2007
याद
न छेड तू पुराने जख्मों को, के इनमे खून अभी बाकी है।
कह तो दिया के भुला चूका हूँ ,पर याद अभी बाक़ी है॥
कह तो दिया के भुला चूका हूँ ,पर याद अभी बाक़ी है॥
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
