सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
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गुरुवार, 1 मार्च 2018

नम आँखें

नम आँखों का पैगाम समझ लो,
कह नहीं सकते बात समझ लो,
न जाओ छोड़कर बीच राह में,
भरे दिल का एहसास समझ लो,

रविवार, 10 अक्टूबर 2010

गम

गम तेरा ले लेंगे हम, खुशियां  अपनी तुझको दे जायेंगे ।

खून के घूंट पी लेंगे हम,दुनिया अपनी तुझको दे जायेंगे ।।

सोमवार, 20 सितंबर 2010

गमों का प्याला

यूं तो रोने की आदत नहीं हमको, पर ये आंसू ना जाने क्यूं छलक आये ।

दिल का प्याला गमों से भर गया शायद, और ये आन्खों से ढलक आये ॥

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

तडप

दिल तडपता है रूह बैचैन होती है, 

हर पल कमी तेरी मह्सूस होती है । 

दीदार की तमन्ना मे जिये जा रहा हूं,

 तेरी बेदर्दी की कसक होती है ॥

मंगलवार, 3 अगस्त 2010

दर्द

तूने मुझे दर्द के सिवा कुछ भी नही दिया है ।

मैने तुझे मुस्कुरा के देखा तो तूने मुंह फ़ेर लिया है ॥

गुरुवार, 13 दिसंबर 2007

दर्द

मेरे सीने मे जिगर भी है, बाखुदा जिगर मे दर्द भी है।
अफ़सोस तो ये है कि, किसी को इसका गुमान भी नहीं है ॥

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
अभी तलाश मे हूं कि . . . . मैं कौन हूं ? ? ?