सुन्दरता सामन्जस्य मे होती है. सारे मानव समाज को सुन्दर बनाने की साधना का ही नाम साहित्य है.... जो जाति जितनी ही अधिक सौन्दर्य प्रेमी है, उसमे मनुष्यता उतनी ही अधिक होती है, किसी जाति के उत्कर्ष व अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है.---डा.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

रविवार, 15 अगस्त 2010

सारे जहां से अच्छा....









सभी को जय हिन्द.....

5 टिप्‍पणियां:

  1. स्वंत्रता दिवस की बधाइयां और शुभकामनाएं

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  2. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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  3. जय हिन्द
    आभार भारतीय ध्वज के विकास को दिखाने के लिये

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति ...

    स्वंत्रता दिवस की बधाइयां और शुभकामनाएं

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